Apr 11, 2016

जो खुद अपने स्ट्रिंगरों को सौ-डेढ़ सौ रुपये देता है, वह मजदूरों को सौ रुपये मिलने पर हैरानी जताता है

आज मैं एक न्यूज़ चैनल पर महाराष्ट्र के लातूर से पानी की किल्लत से लोगो की परेशानियो से जुडी एक स्टोरी देख रहा था, तो चैनल पर ग्राउंड रिपोर्ट चल रही थी जिसमे रिपोर्टर से रोज मजदूरी करने वाले लोग मजदूरी न मिलने से अपने घरो की परेशानिया बता रहे थे मजदूरी करने वाले लोग कह रहे थे की मजदूरी 350 रूपये हैं लेकिन इन दिनों लोग उनको 100 रूपये में भी मजदूरी पर ले जाए तो वो चले जाते हैं क्योकि उनके पास काम नहीं हैं। तो रिपोर्टर बड़ी हैरानी से उनसे कह रहे थे की 100 रूपये रोज में उनका घर का खर्चा कैसे चलता होगा, जबकि वो खुद एक प्रदेशिक चैनल के चैनल हैड भी हैं, जिसमे अपने स्ट्रिंगरों को वो 150 से 200 रूपये स्टोरी के हिसाब से पैमेंट करते हैं और वो भी 3 से 4 महीने लेट देते हैं।


उस पैमेंट से स्ट्रिंगर अपनी स्टोरी पर लगने वाला पेट्रोल व् अन्य खर्च भी खुद वहन करता हैं। उस वक्त खुद मुझे अपनी भी हालात उस सूखे पड़े प्रदेश के मजदूरो जैसी दिखाई दी, क्योकि मुझे भी एक स्टोरी पर 150 से 200 रूपये ही मिलते हैं मैं सोच रहा था की मेरा घर इनके चैनल में काम करके कैसे चैनल चल रहा हैं ये तो मुझसे कभी नहीं पूछा गया न ही कभी कहाँ गया की आप हमारे चैनल के लिए दिन रात सालो से काम कर रहे हैं तो आपको ही क्या आप जैसे सभी स्ट्रिंगरों को ज्यादा पैसा मिलना चाहिए ताकि आप अपना गृहस्त जीवन अच्छे से चला सके, और हमारे चैनल के लिये ओर ज्यादा मेहनत कर सकें।

लेकिन उनको खुद इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योकि उनको तो चैनल से लाखो रूपये महीनो में मिलते हैं। वो तो बस सिर्फ अपने चैनल की टीआरपी बढाने के लिए टीवी के सामने जनता के दर्द का सामने लाने का प्रयास करते हैं मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूँ की दुसरो पर ऊँगली उठाने से पहले खुद अपने गिरेवान में भी झाक कर देख लेना चाहिए की हम कितने पाक साक हैं उनके चैनल में काम करने वाले स्ट्रिंगर कैसे अपने गृहस्ती वाले जीवन को उन पैसो में कैसे चलाते हैं। मैं ये टिपण्णी एक निजी चैनल पर नहीं बल्कि उन सभी चैनल के लिए कर रहा हु जो अपने स्ट्रिंगरों के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं। हम स्ट्रिंगर लोगो की समस्याओ को उठाते हैं लेकिन खुद अपने समस्या को नहीं रख पाते, क्योकि हम डरते हैं अपनी झूठी शान खत्म होने से। मैं भड़ास 4 मीडिया के माध्यम से यही कहना चाहता हु की न्यूज़ चैनल को अपने स्ट्रिंगरों की दयनीय हालात पर भी विचार करना चाहिए, क्योकि स्ट्रिंगर भी आपके चैनल का ही एक हिस्सा हैं।
     
एक मजबूर स्ट्रिंगर द्वारा भेजा गया पत्र.

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